Parishram Ka Mahatva Hindi Essay

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परिश्रम का महत्त्व

परिश्रम से अभिप्राय उस प्रयत्न से है जो किसी व्यक्ति द्वारा अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया जाता है | मनुष्य की उन्नति का एकमात्र साधन उसके द्वारा किया गया परिश्रम ही है | सभी प्रकार की धन – सम्पत्तियाँ और सफलताएँ निरन्तर किए गे परिश्रम से ही प्राप्त हुआ करती है | ऐसा कहा जाता है कि ‘उद्दोगिनम पुरुष सिह्नुपैत्ति लक्ष्मी :” अर्थात उद्दोग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहो का ही लक्ष्मी वरन किया करती है | यह कटु सत्य है कि परिश्रम ही सफलता की कुजी है |

निरन्तर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त – दुरुस्त रख कर सजग तो बनाता ही है, निराशाओ से दूर रखकर आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है | उद्दमी या परिश्रमी व्यक्ति जो भी चाहे कर सकते है | जो मनुष्य पुरुषार्थी है और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मन, वचन और कर्म से लगातार कठोर परिश्रम करते रहते है , सफलता उनके कदम चूमती है | उसके विपरीत जो व्यक्ति परिश्रम नही करते है उनका जीवन दुखी बना रहता है | संसार का इतिहास साक्षी है कि जो जातियाँ आज उन्नति के शिखर पर है, उनकी उन्नति का एकमात्र रहस्य उनका परिश्रमी होना है | अमेरिका तथा जापान देशो के उदाहरण हमारे सम्मुख है | ये देश आज धन – धान्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है |

परिश्रम किसी भी प्रकार का हो , शारीरिक या मानसिक , दोनों ही प्रकार के परिश्रम गौरव प्राप्त करने के कारण है | प्राय: देखा गया है कि रस्सी की ल्ग्गातार रगड से कुएँ का भरी-से –भारी पत्थर भी घिस जाता है | यह भी परिश्रम का एक उत्तम उदाहरण है | संसार में अनेको ऐसे महापुरुष हुई है जिन्होंने कठोर परिश्रम द्वारा अपने जीवन को उज्ज्वल बनाया है | उनमे से बाल गंगाधर तिलक, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस , जार्ज वाशिगटन, नेपोलियन बोना पार्ट , हिटलर , अब्राहिम लिंकन आदि महापुरुषों के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है |

महाकवि तुलसीदास जी ने ठीक ही कहा है – ‘सकल पदारथ है जग माही कर्महीन नर पावत नाही |’ अर्थात इस संसार में सभी प्रकार के पदार्थ मौजूद है, जो लोग कर्म नही करते , इन्हें नही पा सकते | परिश्रम के सामने तो प्रकृति भी झुक जाती है और दासी की तरह कार्य करने लगती है | परिश्रम ही ईश्वर की सच्ची उपासना है \ इससे हमारा लोक – परलोक भी सुधर जाता है |

इस प्रकार स्पष्ट है की परिश्रम करने वाले के सामने कभी कोई बाधा नही टिक सकती | अंत : यदि हम अपने जीवन पथ पर निर्बाध गति से आगे बढना चाहते है तो हमे निरन्तर परिश्रम करते रहना चाहिए | दृढ निश्चय करके परिश्रम करने वाले व्यक्ति ही सदैव असफलताओं और पराजयों को पीछे ढकेल कर विजय का आलिंगन करते है |

February 8, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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जीवन में श्रम का विशेष महत्व है । मेहनत वह सुनहरी कुंजी है जो भाग्य के बंद कपाट खोल देती है । परिश्रम ही जीवन की सफलता का रहस्य है ।

परिश्रम का अर्थ है ‘उद्द्य्म’ अथवा ‘मेहनत’ । परिश्रम वह माध्यम है जो मनुष्य को मनोरथ की मंजिल तक पंहुचाता है । श्रम के मुख्य दो भेद होते हैं- मानसिक श्रम और शारीरिक श्रम । मनन, चिंतन, अध्ययन मानसिक श्रम है । शरीर के द्वारा किये जाने वाले शर्म को शारीरिक श्रम कहते हैं । जीवन में मानसिक और शारीरिक श्रम दोनों का अपना अपना महत्व है ।

मानव जीवन में परिश्रम की महिमा असीम है । यही राजा को रंक और दुर्बल को सबल बना देती है । परिश्रमी व्यक्ति अपना भाग्य-विधाता और समाज का निर्माता होता है । जिस देश के लोग परिश्रमी होते हैं, वह राष्ट्र उतनी अधिक उन्नति करता है । चीन, जापान, अमेरिका आदि इसके उदाहरण हैं ।

प्रकृति भी हमें परिश्रम करने की प्रेरणा देती है । चींटियाँ और मधुमखियाँ प्रकृति की प्रेरणा स्त्रोत हैं । आलस्य मनुष्य का बहुत बड़ा शत्रु है । श्रम ही जीवन है, वही मनुष्य का सच्चा मित्र है । इसलिए कहा जाता है ‘श्रममेव जयते’ ।

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